Tuesday, 16 May 2017

Maa...

Khana time se kha lena.. 
Roz jaane se pehle, 
Aur aane ke baad, 
Phone lagana… 
Bahar ka kuchh mat khana… 
Agle Sunday kaise bhi ho 
Ghar aa jaana…!!! " 

Pehli baar jab tum se dur 
Hua tha main.. 
Raat bhar tumhe khojti hui, 
Meri aankhe kaha soyi thi.. 
Mujhe pata hai maa 
Us din ghar jaate huye 
Tum pure raaste royi thi…!!! 

~ Abhishekk 

Saturday, 13 May 2017

पिता


पिता जीवन हैसंबल हैशक्ति है 
पिता सृष्टि के निर्माण की अभिव्यक्ति है 
पिता उंगली पकड़े बच्चे का सहारा है 
पिता कभी कुछ खट्टाकभी खारा है 
पिता पालन हैपोषण हैपारिवारि का अनुशासन है 
पिता धौंस से चलने वाला प्रेम का प्रशासन है 
पिता रोटी हैकपड़ा हैमकान है 
पिता छोटे से परिंदे का बड़ा आसमान है 
पिता अपदर्शित अनन्त प्यार है 
पिता है तो बच्चों को इंतजार है 
पिता से ही बच्चों के ढेर सारे सपने हैं 
पिता है तो बाज़ार के सब खिलौने अपने हैं 
पिता से परिवार में प्रतिपल राग है 
पिता से ही माँ का बिंदी और सुहाग है 
पिता परमात्मा की जगत के प्रति आसक्ति है 
पिता गृहस्थ आश्रम में उच्च स्थिति की भक्ति है 
पिता अपनी इच्छाओं का हनन और परिवार की पूर्ति है 
पिता रक्त में दिये हुए संस्कारों की मूर्ति है 
पिता एक जीवन को जीवन का दान है 
पिता दुनिया दिखाने का अहसान है 
पिता सुरक्षा हैसिर पर हाथ है 
पिता नहीं तो बचपन अनाथ है 
तो पिता से बड़ा तुम अपना नाम करो 
पिता का अपमान नहींउन पर अभिमान करो 
क्योंकि मां­बाप की कमी कोई पाट नहीं सकता 
और ईश्वर भी इनके आशीशों को काट नहीं सकता 
विश्व में किसी भी देवता का स्थान दूजा है 
मां­बाप की सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है 
विश्व में किसी भी तीर्थ की यात्राएं व्यर्थ हैं 
यदि बेटे के होते मां­बाप असमर्थ हैं 
वो खुशनसीब हैं मां­बाप जिनके साथ होते हैं 
क्योंकि मा­बाप की आशीशों के हजारो हाथ होते हैं 
ओम व्यास ओम