मैं और मेरी तनहाई
अक्सर ये बातें करते है
तुम अगर कविता लिखती
तो कैसा होता
तुम ये लिखती
तुम वो लिखती
तुम पहली मुलाकात लिखती
तुम जुदाई की रात लिखती
तुम शायद वो लिखती
जो कभी कह नहीं पाई
तुम शायद वो लिखती
जो मैं कभी समझ नहीं पाया
अपने अन्दर कितना कुछ
छिपा रखा है तुमने
कितना अच्छा होता
अगर तुम लिखती।
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