Friday, 3 February 2017

Kabhi Kabhi

 कभी कभी तो तुम्हारे खत के
अक्षर मिट जाते है
स्याही सुर्ख लाल हो जाती है
अमलतास के फूलों जैसी
जो देखे थे हमने
पिछली छुट्टियों में तुम्हारी
और कैसे समंदर की गीली रेत पर,
" सिर्फ तुम्हारी ... " लिखा था
मगर बीती रात अजीब ख्वाब देखा,
मैं अकेले टहल रही हूँ समंदर पे ,
रेत सारी उबल रही है
मैं चाहती हूँ की गीले पैरों से चल कर
उनकी प्यास बुझा दूँ,
पर अचानक समंदर सूख जाता है
इस तरह रोज रात में ... सपनो में ...
धीरे धीरे तेरा ख़याल जब आता है
यकीन मानो ... दिल चीर जाता है  


अभिषेक

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