कभी कभी तो तुम्हारे खत के
अक्षर मिट जाते है
स्याही सुर्ख लाल हो जाती है
अमलतास के फूलों जैसी
जो देखे थे हमने
पिछली छुट्टियों में तुम्हारी
और कैसे समंदर की गीली रेत पर,
" सिर्फ तुम्हारी ... " लिखा था
मगर बीती रात अजीब ख्वाब देखा,
मैं अकेले टहल रही हूँ समंदर पे ,
रेत सारी उबल रही है
मैं चाहती हूँ की गीले पैरों से चल कर
उनकी प्यास बुझा दूँ,
पर अचानक समंदर सूख जाता है
इस तरह रोज रात में ... सपनो में ...
धीरे धीरे तेरा ख़याल जब आता है
यकीन मानो ... दिल चीर जाता है
अभिषेक
अक्षर मिट जाते है
स्याही सुर्ख लाल हो जाती है
अमलतास के फूलों जैसी
जो देखे थे हमने
पिछली छुट्टियों में तुम्हारी
और कैसे समंदर की गीली रेत पर,
" सिर्फ तुम्हारी ... " लिखा था
मगर बीती रात अजीब ख्वाब देखा,
मैं अकेले टहल रही हूँ समंदर पे ,
रेत सारी उबल रही है
मैं चाहती हूँ की गीले पैरों से चल कर
उनकी प्यास बुझा दूँ,
पर अचानक समंदर सूख जाता है
इस तरह रोज रात में ... सपनो में ...
धीरे धीरे तेरा ख़याल जब आता है
यकीन मानो ... दिल चीर जाता है
अभिषेक
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