Thursday, 26 January 2017

Fibnocci poem!

पल 
पल 
हर पल 
तेरी यादों के 
बिखरे मोती समेटता रहता हूँ 
खुद को धागा बनाकर उसमें पिरोता रहता हूँ  
~ अभिषेक  

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