Saturday, 10 September 2016

रात चाँद की

बादलों में छिपा रहा चाँद 
पूरी रात 
कल चौदहवीं की रात थी 
 
मैं देखता रहा उसे 
एकटक 
और यूँ ही नींद आ गयी 
 
फिर तुम आईं ख्वाब में 
मुस्कुराई 
मुझे नींद से जगाया भी 
 
आखिर कल चाँद देख ही लिया मैंने 
कल चौदहवीं की रात थी ... 
 
" अभिषेक नागर 

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